जिंदगी

जिंदगी

जिंदगी एक उपन्यास है, एक अधूरी पढ़ी किताब है, 
ना जाने क्या लिखू इसमें, कुछ नये अनसुने शब्दो कि तलाश है। 
उम्मीदो के सहारे लिख रहा हूँ, मैं ये एहसास भी बडा लाजवाब है।
क्या खूब लिखते है लिखने वाले भी, 
उनके लिखने का कुछ अलग ही अन्दाज है ।
अनुभव सिखाते है लब्ज़ो को शब्दो मे पिरोना, वरना हमारी क्या औकात है।
जिंदगी ने सिखाया है कुछ ठोकरे देकर, और हमने अपने हौसले को आजमाया है ।
लिखना चाहता था कुछ खास, बस यू ही नहीं अपनी कलम चलाया है ।
सींख लूँगा लिखना भी उन महानो की तरह जिसने, लिखकर अपनी तकदीर को बनाया है। 
देखा था मैने अपने पापा को भी लिखते हुए, बस उन्ही की राह मे खुद को बढाया है।
शायद ना बन सकूँ उनकी तरह लेकिन, एक प्रयास किया और खुद को आजमाया है।

Image by Jose Antonio Alba from Pixabay

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