जाना है बहुत दूर

जाना है बहुत दूर

बचपन की बातें
उन्मुक्त से तराने ।
आज कहीं खो गए
जिम्मेदारियों के बोझ तले
उम्र के सफर
हर मोड़ पर
जब
तन्हा होता है
कठिन होता है वो वक्त….
जब हमारी सोच-ए-समझ
हो जाते हैं शांत…. बिल्कुल शांत ।
वो तन्हा वक्त
हमें याद दिलाता है
अपने अच्छे बुरे फसाने….
शायद
बताना चाहता है
अभी लंबा है सफर
कठिन है डगर
पर
जाना है बहुत दूर
जाना है बहुत दूर….

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This Post Has 2 Comments

  1. shubh

    nice poem

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